विनोद कुमार @ केराकत, जौनपुर। जिस स्वराज्य की ज्योति दक्खन की भूमि से प्रज्वलित हुई थी, उसकी तेजस्वी आभा अब उत्तर भारत की पावन धरती जौनपुर में भी आलोकित हो उठी है। ग्राम–उद्यान, कुसरना में "छत्रपति शिवाजी महाराज ज्ञान-गंगा" परियोजना का भूमि पूजन एवं शिलान्यास समारोह ऐतिहासिक और भाव—विभोर कर देने वाले वातावरण में सम्पन्न हुआ।
यह महत्त्वाकांक्षी एवं जनहितकारी परियोजना आशा ज्योति रूरल उड़ान फाउंडेशन द्वारा संचालित की जा रही है जिसका ध्येय है शिक्षा, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता के माध्यम से ग्रामीण भारत को नई दिशा देना।समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे कोल्हापुर सांसद छत्रपति शाहू महराज जो छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज हैं। उनके कर-कमलों द्वारा विधिवत भूमि पूजन एवं शिलान्यास सम्पन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्वलन और राष्ट्रगान के साथ आरंभ हुआ यह कार्यक्रम मानो इतिहास और वर्तमान का दिव्य संगम बन गया।
अपने संबोधन में उन्हों ने कहा "छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक शासक नहीं, बल्कि राष्ट्र के स्वाभिमान, न्याय और सुशासन के जीवंत प्रतीक हैं। जौनपुर की इस भूमि पर ज्ञान-गंगा का प्रवाह आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वर्णिम भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा।" संस्थापक रवि प्रेमनाथ उपाध्याय ने कहा कि यह संस्थान पूर्णतः निःशुल्क रहेगा, ताकि कोई भी बालक या बालिका आर्थिक अभाव के कारण अपने सपनों से वंचित न रहे। उन्होंने यह भी बताया कि यह परियोजना उनके पूज्य दादा जी स्व. कामता प्रसाद उपाध्याय, माता आशा प्रेमनाथ उपाध्याय की पावन स्मृति को समर्पित है।
यह केंद्र केवल भवन नहीं, बल्कि एक विचार है, एक संकल्प है। यूपीएससी समर्पित आधुनिक पुस्तकालय, डिजिटल ई-लर्निंग एवं कंप्यूटर प्रयोगशाला कौशल विकास एवं रोजगार प्रशिक्षण (टेक्सटाइल आधारित विशेष पहल) महिला सशक्तिकरण एवं उद्यमिता मार्गदर्शन,
करियर काउंसलिंग एवं प्रतियोगी परीक्षा तैयारी, आधुनिक एवं सतत कृषि प्रशिक्षण, कार्यक्रम में मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। सामाजिक कार्यकर्ताओं का अभिनंदन हुआ तथा ग्रामवासियों ने सामूहिक रूप से "ज्ञानस्वराज्य" के इस अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
समारोह का समापन राष्ट्र निर्माण और सामाजिक जागरण के संकल्प के साथ हुआ। अंत में सभी उपस्थित जनों के लिए स्नेहभोज की व्यवस्था की गई। जौनपुर की यह पावन भूमि अब केवल इतिहास की साक्षी नहीं, बल्कि भविष्य के स्वर्णिम अध्याय की भी आधारशिला बन चुकी है। "छत्रपति शिवाजी महाराज ज्ञान-गंगा" के रूप में शिक्षा की यह धारा आने वाली पीढ़ियों के जीवन में प्रकाश, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का नवप्रभात लायेगी।