इंद्रा एक्सप्रेस नेटवर्क
नौपेड़वा, जौनपुर। बक्शा कृषि विज्ञान केंद्र पर उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद लखनऊ द्वारा वित्तपोषित दो दिवसीय प्राकृतिक खेती विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतिम दिन किसानों को वैज्ञानिकों ने जीवामृत बनाने की विधि की जानकारी दी गयी। कार्यक्रम में कृषकों को प्राकृतिक खेती से संबंधित व्यावहारिक एवं कौशल आधारित ज्ञान की जानकारी दी गई जिससे किसान प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों से प्रत्यक्ष रूप से रूबरू हो सके। इस दौरान कृषकों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता करतें हुए प्राकृतिक खेती अपनाने में गहरी रुचि प्रदर्शित की।केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. सुरेश कनौजिया ने जैविक विधि से पोषक तत्वों के प्रबंधन पर गहन एवं उपयोगी चर्चा किया तो वैज्ञानिक डॉ. राजीव सिंह ने प्राकृतिक खेती के मूल सिद्धांतों पर विस्तार से जानकारी दिया। दो दिवसीय प्रशिक्षण में पादप सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. रूपेश सिंह ने प्राकृतिक विधियों से कीट, रोग एवं खरपतवार नियंत्रण के व्यावहारिक जानकारी दिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम समन्वयक डॉ. हरि ओम वर्मा ने प्राकृतिक खेती के चार प्रमुख स्तम्भ जीवामृत, बीजामृत, आच्छादन एवं वाफसा पर विस्तृत चर्चा करते हुए कृषकों को लाभान्वित किया। कार्यक्रम के समापन पर कृषकों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए प्राकृतिक खेती को अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त किया।