जौनपुर। शिक्षा ही समाज को सशक्त, समर्थ, सार्थक बना सकती है। देश, समाज के विकास का आधार ही शिक्षा है। जो समाज, देश शिक्षा से पीछे या वंचित रहता है वहां गरीबी, भुखमरी, बेकारी, बेगारी, बीमारी, बंधुवा मजदूरी, आर्थिक दुष्चक्र, कुरीतियों, कुप्रथाओं, अंधविश्वास, आडंबर, पाखंड, शोषण, अत्याचार आदि का बोलबाला रहता है। कोई भी अदना आके आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक ताना—बाना को छिन्न भिन्न कर देता है। वहां के लोग अशिक्षा, शोषण, वाचनाओं के दुष्चक्र में फंसकर रह जाते हैं। शिक्षा के महत्व और शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के क्रम में आज विशेष काव्य प्रस्तुति---
शिक्षा तुम्हे सशक्त और समर्थ बनाती है,
शिक्षित बनाकर जीवन को नव अर्थ दिलाती है।
शिक्षा नहीं तो कुछ भी अर्थ नहीं जीवन का,
अशिक्षा देती रही राह तेरे शोषण का।
होता रहा अशिक्षों का शोषण सदियों से,
काट बेड़ियां, पांव पड़ी थी जो सदियों से।
शिक्षा बिना तुम्हारा हक सब छीन के खाए ,
तुम अज्ञानी फिर भी उन्हीं का ही गुण गाये।
तेरे हिस्से शोषण, वंचना, निर्धनता आई,
अंधविश्वास, पाखंड, मलिनता हाथ में आई।
रहे अशिक्षित हाथ में आता मोटा काम,
तेरे श्रम, उपजों का मिलता आधा दाम।
बहुत दंश झेले हो अशिक्षा, निरक्षरता का,
अब से जागो चुनो राह तुम साक्षरता का।
शिक्षित होकर ही तुम आगे बढ़ सकते हो,
शोषण अत्याचार के विरुद्ध लड़ सकते हो।
शिक्षा तुमको तार्किक और सतर्क बनाती है,
अंधविश्वास, पाखंड दूर कर तर्क कराती है।
शिक्षा तुमको ज्ञान मान धन से भर देगी ,
तुम सबके दुख, दर्द, कष्ट को हर लेगी।
पद पैसा प्राधिकार तुम्हे शिक्षा ही देगी ,
बदले में कुछ लगन, समर्पण त्याग ही लेगी।
करो त्याग, संघर्ष करो शिक्षा के खातिर,
शिक्षा से वंचित करने में कुछ लगे हैं शातिर।
वो चाहेंगे तुम जीवन भर रहो निरक्षर,
पर तेरा संघर्ष त्याग कर देगा साक्षर।
सारी ऊर्जा, तन—मन—धन सब कुछ ही झोंको,
शिक्षा से खुद को या वंश को कभी न रोको।
रोड़े मिलेंगे शिक्षा के पथ बहुत ही सारे,
पर तुम आगे बढ़ जा उनको लगा किनारे।
शिक्षा में ही है भविष्य तेरी पीढ़ी का,
एक भी पायदान न टूटे शिक्षा के सीढ़ी का।
छोड़ निराशा कुंठा चलो पढ़ाई कर लो,
जीवन पथ का अंधकार, कुंठाई हर लो।
हर दिन जा स्कूल ज्ञान का दीप जलाओ,
हर प्रयास कर शिक्षा को दिल से अपनाओ।
सुनील यादव
जिला मलेरिया अधिकारी, जौनपुर।
शीर्षक: शिक्षा की सार्थकता
शिक्षा तुम्हे सशक्त और समर्थ बनाती है,
शिक्षित बनाकर जीवन को नव अर्थ दिलाती है।
शिक्षा नहीं तो कुछ भी अर्थ नहीं जीवन का,
अशिक्षा देती रही राह तेरे शोषण का।
होता रहा अशिक्षों का शोषण सदियों से,
काट बेड़ियां, पांव पड़ी थी जो सदियों से।
शिक्षा बिना तुम्हारा हक सब छीन के खाए ,
तुम अज्ञानी फिर भी उन्हीं का ही गुण गाये।
तेरे हिस्से शोषण, वंचना, निर्धनता आई,
अंधविश्वास, पाखंड, मलिनता हाथ में आई।
रहे अशिक्षित हाथ में आता मोटा काम,
तेरे श्रम, उपजों का मिलता आधा दाम।
बहुत दंश झेले हो अशिक्षा, निरक्षरता का,
अब से जागो चुनो राह तुम साक्षरता का।
शिक्षित होकर ही तुम आगे बढ़ सकते हो,
शोषण अत्याचार के विरुद्ध लड़ सकते हो।
शिक्षा तुमको तार्किक और सतर्क बनाती है,
अंधविश्वास, पाखंड दूर कर तर्क कराती है।
शिक्षा तुमको ज्ञान मान धन से भर देगी ,
तुम सबके दुख, दर्द, कष्ट को हर लेगी।
पद पैसा प्राधिकार तुम्हे शिक्षा ही देगी ,
बदले में कुछ लगन, समर्पण त्याग ही लेगी।
करो त्याग, संघर्ष करो शिक्षा के खातिर,
शिक्षा से वंचित करने में कुछ लगे हैं शातिर।
वो चाहेंगे तुम जीवन भर रहो निरक्षर,
पर तेरा संघर्ष त्याग कर देगा साक्षर।
सारी ऊर्जा, तन—मन—धन सब कुछ ही झोंको,
शिक्षा से खुद को या वंश को कभी न रोको।
रोड़े मिलेंगे शिक्षा के पथ बहुत ही सारे,
पर तुम आगे बढ़ जा उनको लगा किनारे।
शिक्षा में ही है भविष्य तेरी पीढ़ी का,
एक भी पायदान न टूटे शिक्षा के सीढ़ी का।
छोड़ निराशा कुंठा चलो पढ़ाई कर लो,
जीवन पथ का अंधकार, कुंठाई हर लो।
हर दिन जा स्कूल ज्ञान का दीप जलाओ,
हर प्रयास कर शिक्षा को दिल से अपनाओ।
सुनील यादव
जिला मलेरिया अधिकारी, जौनपुर।