नौपेड़वा, जौनपुर। स्थानीय बाजार में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भभागवत महापुराण कथा के छठवें दिन कथा वाचक आचार्य डॉ. जयेश मिश्र ने कहा कि भारतीय संस्कृति में विवाह एक संस्कार है जिसका पालन सनातन धर्म ही विधिवत करता है।
रूक्मिणी विवाह कथा सुनाते हुए श्री मिश्र ने कहा कि जीव रुपी पिता जब नारायण रुपी वर का चरण धोता है तो अहंकार समाप्त होता है और ममता रुपी बेटी का हाथ समर्पित करता है तो ममता पूर्ण रूप से समर्पित हो जाती है। उन्होंने कहा कि विवाह के माध्यम से जीव ब्रम्ह का साक्षात्कार हो जाता है। हमें सत्कर्म करना चाहिये और संघर्ष को कल पर टाल देना चाहिये। गज ग्राह प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान अपने दास की मुक्ति बाद में करते हैं किन्तु दासानु दास की मुक्ति पहले करते हैं।श्री मिश्र ने गोपियों की कथा सुनाते हुए कहा कि गोपियों को अपनी मृत्यु का कष्ट नहीं था बल्कि मृत्यु का कलंक उनके प्रेमास्पद कन्हैया श्रीकृष्ण को न लगे इस बात था। श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह प्रसंग पर भक्तजन झूमने लगे। इस अवसर पर महेश मोदनवाल, गुड़िया देवी, राम आसरे मोदनवाल, विजय मोदनवाल, राजेश मोदनवाल, रानू मोदनवाल, विनय जायसवाल, विजय जायसवाल, बच्चा मोदनवाल, चंदन मोदनवाल सहित सैकड़ों भक्तजन मौजूद रहे।