इंद्रा एक्सप्रेस नेटवर्क
सांसद प्रतिनिधि मनोज मौर्य और अधिवक्ता अश्वनी मौर्य समेत चारों दोषी करार, 26 अगस्त को सजा पर होगी बहस
जौनपुर। लाइन बाजार थाना क्षेत्र के बहुचर्चित मियांपुर हत्याकांड में करीब 22 साल बाद न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अनिल कुमार यादव की अदालत ने वर्ष 2004 में हुए इस चर्चित हत्याकांड में चार सगे भाइयों को हत्या और हत्या के प्रयास का दोषी करार दिया है। दोषियों में सांसद बाबू सिंह कुशवाहा के प्रतिनिधि बताए जा रहे मनोज कुमार मौर्य, अधिवक्ता अश्वनी कुमार मौर्य, आशीष मौर्य और पवन कुमार मौर्य शामिल हैं। अदालत अब 26 अगस्त को दोषियों को दी जाने वाली सजा के प्रश्न पर सुनवाई करेगी।
जमीन पर कब्जे को लेकर आमने-सामने आए थे दोनों पक्ष
मामला 16 अगस्त 2004 का है। अभियोजन के मुताबिक मियांपुर में एक विवादित जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी जमीन का मौके पर निरीक्षण करने के लिए 16 अगस्त को कमिश्नर के पहुंचने की बात थी। इससे पहले सुबह करीब साढ़े आठ बजे कलेक्ट्रेट के अधिवक्ता रहे रामसेवक मौर्य अपने चार पुत्रों अश्वनी, आशीष, मनोज और पवन मौर्य तथा पड़ोसी राजेश उर्फ छोटू के साथ विवादित जमीन पर पहुंचे।
आरोप है कि वहां बांस-बल्ली गाड़कर जमीन पर कब्जे की कोशिश की गई। वादी पक्ष ने इसका विरोध किया तो दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई। अभियोजन के अनुसार रामसेवक मौर्य ने लाठी से हमला किया, जबकि पवन कुमार ने अपने पिता की लाइसेंसी बंदूक से और अश्वनी, आशीष तथा मनोज ने तमंचों से फायरिंग की।
फायरिंग में आशीष कुमार मौर्य की गोली लगने से मौत हो गई। वहीं छेदीलाल, जियालाल, वीरेंद्र, शशिबाला, रमाशंकर और प्रेमचंद मौर्य समेत कई लोग घायल हुए थे। घटना के बाद इलाके में काफी तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी।
जिस थाने में रिपोर्ट हुई, वहीं से शुरू हुई जांच
मामले की प्राथमिकी पवन कुमार मौर्य की ओर से लाइन बाजार थाने में दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए आरोपितों की गिरफ्तारी की। विवेचना के दौरान पवन कुमार की निशानदेही पर रामसेवक मौर्य के घर से घटना में इस्तेमाल की गई लाइसेंसी बंदूक भी बरामद की गई।
पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। इसके बाद मामला लंबे समय तक न्यायालय में विचाराधीन रहा।
गवाहों और साक्ष्यों की पैरवी बनी फैसले का आधार
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने घटना से जुड़े गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। सरकारी अधिवक्ता तथा अधिवक्ता विजय नारायण सिंह ने अभियोजन की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए आरोपों के समर्थन में साक्ष्य पेश किए।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने अश्वनी कुमार मौर्य, आशीष मौर्य, मनोज कुमार मौर्य और पवन कुमार मौर्य को हत्या तथा हत्या के प्रयास का दोषी माना।
एक आरोपित की मौत, दूसरा हुआ बरी
मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपित रामसेवक मौर्य की मृत्यु हो गई, जिसके चलते उनके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त हो गई। वहीं राजेश उर्फ छोटू को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया।
अब इस 22 साल पुराने मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख 26 अगस्त है। इसी दिन अदालत चारों दोषियों को दी जाने वाली सजा के संबंध में सुनवाई करेगी। लंबे समय से न्यायालय में चल रहे इस मामले के फैसले पर मियांपुर समेत पूरे जनपद की नजर बनी हुई है।