इंद्रा एक्सप्रेस नेटवर्क
अयोध्या। जनपद के मुख्य बाजार यानी चौक क्षेत्र से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और प्रशासनिक हलचल पैदा करने वाली खबर सामने आ रही है। चौक स्थित सब्जी मंडी सराय मस्जिद के समीप बेशकीमती नजूल भूमि पर दशकों से बने अवैध मकानों, पक्के निर्माणों और दुकानों को शुक्रवार के दिन जिला प्रशासन ने भारी-भरकम बुलडोजर चलाकर पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। प्रदेश सरकार द्वारा यहां प्रस्तावित एक अत्याधुनिक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के निर्माण हेतु इस पूरी विधिक जमीन को खाली कराया गया है। तोड़—फोड़ की इस कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए मौके पर भारी संख्या में पीएसी, नागरिक पुलिस बल और जिले के आला प्रशासनिक अधिकारी मुस्तैद रहे जिनकी सीधी निगरानी में कई अवैध ढांचों को ढहाकर पूरे क्षेत्र को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त करा दिया गया।प्रशासनिक टीम ने ध्वस्तीकरण की इस विधिक कार्रवाई को अंजाम देने के साथ ही मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए विस्थापित और प्रभावित होने वाले परिवारों को राहत के तौर पर सरकारी मुआवजे के चेक भी मौके पर ही वितरित किए। हालांकि घर और दुकान छिन जाने के गम में डूबे कई प्रभावित परिवारों ने सरकार द्वारा दी गई मुआवजे की इस धनराशि को ऊंट के मुंह में जीरा और अत्यधिक नाकाफी बताते हुए कड़ा विरोध व घोर नाराजगी दर्ज कराई। बेघर हुए स्थानीय निवासियों का स्पष्ट रूप से कहना है कि वे पीढ़ियों से इस स्थान पर रह रहे थे और अब उन्हें अचानक उजाड़ दिया गया है; ऐसे में पुनर्वास के लिए सरकार को उन्हें कम से कम इतनी उचित आर्थिक सहायता अवश्य देनी चाहिए थी जिससे वे शहर के किसी अन्य सुरक्षित इलाके में जमीन खरीदकर अपने बच्चों के लिए एक नया आशियाना खड़ा कर सकें।इस प्रशासनिक कार्रवाई की जद में आई एक अत्यंत लाचार प्रभावित महिला नजमा ने रोते हुए अपना दर्द बयां किया कि प्रशासन की तरफ से उन्हें मुआवजे के नाम पर महज 40 हजार रुपये (40,000) का चेक थमाया गया है। उन्होंने रुआंसे गले से सवाल किया कि आज के इस महंगाई के दौर में मात्र चालीस हजार रुपये में नया घर कैसे बन सकता है? नजमा ने बताया कि उनके पति लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार चल रहे हैं और घर में कमाने वाला कोई दूसरा जरिया नहीं है जिससे उनके पास कोई स्थायी रोजगार भी नहीं बचा है। ऐसे संकट के समय में दो छोटे बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी के साथ एक नई छत का प्रबंध करना उनके लिए नामुमकिन जैसा है; इसलिए उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट से इस फैसले पर सहानुभूतिपूर्वक पुनर्विचार करने और उचित वित्तीय सहायता प्रदान करने की भावुक गुहार लगाई है। इसी प्रकार स्थानीय निवासी मोहम्मद रसीद ने भी तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी कम राशि से न कहीं एक बिस्सा जमीन खरीदी जा सकती है और न ही ईंट-गारे का काम शुरू हो सकता है जिससे कई गरीब परिवार सरेआम खुले आसमान के नीचे आने को मजबूर हो गए हैं।दूसरी ओर, इस बड़ी कार्रवाई के पीछे के विकास मॉडल को स्पष्ट करते हुए आधिकारिक प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि खाली कराई गई इस विस्तृत नजूल भूमि पर राज्य सरकार की एक अति-महत्वाकांक्षी योजना के तहत करीब 200 दुकानों वाला एक भव्य और आधुनिक कमर्शियल (व्यावसायिक) कॉम्प्लेक्स निर्मित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार इस हाईटेक परियोजना के धरातल पर उतरने से अयोध्या के मुख्य चौक बाजार क्षेत्र में व्यापारिक और आर्थिक गतिविधियों को अभूतपूर्व पंख लगेंगे। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और व्यवसाय के सैकड़ों नए अवसर पैदा होंगे। जहां जिला प्रशासन का दावा है कि यह पूरी बेदखली और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह से विधिक नियमों और न्यायालयी गाइडलाइंस के दायरे में रहकर की गई है, वहीं बेघर हुए प्रभावित परिवार अब भी उचित पुनर्वास और पर्याप्त मुआवजे की मांग को लेकर अपनी जिद पर अड़े हुए हैं जिसके चलते पूरे शहर में विकास बनाम विस्थापन के इस मुद्दे पर बहस अत्यधिक तेज हो गई है।