Hot Posts

6/recent/ticker-posts

Ad Code

Jaunpur: माचिस उद्योग संकट में,बीस वर्षों से एक ही रेट स्थिर।

इंद्रा एक्सप्रेस नेटवर्क 

शाहगंज, जौनपुर। माचिस उद्योग पर संकट के बादल छा गए हैं। करीब 20 वर्ष से माचिस का रेट स्थिर है। कच्चे माल के दाम में बेतहाशा वृद्धि और बने माल का दाम न बढ़ने से यह उद्योग संकट के दौर से गुजरने लगा है। इस उद्योग से लगभग पांच लाख श्रमिकों की नौकरियां जाने का खतरा बना है। नगर में आये माचिस उद्योग के प्रमुख निर्माता लिबर्टी मैच कम्पनी प्राइवेट लिमिटेड के महा प्रबंधक के. एम्ब्रोस ने बताया कि वर्तमान में पश्चिम एशियाई देशों में चल रहे युद्ध के कारण कच्चे माल के आपूर्तिकर्ता इसे बहाना बनाकर प्रतिदिन अनियंत्रित रूप से कीमतें बढ़ा रहे हैं।इसके परिणामस्वरूप निर्माता आवश्यक कच्चा माल खरीदने में असमर्थ हो गए हैं।पहले से ही सिगरेट लाइटरों की बढ़ती बिक्री और जीएसटी रिटर्न की कमी के कारण पूंजी अवरुद्ध हो गई है। इससे माचिस उद्योग गंभीर दबाव में है। इसके अतिरिक्त वर्तमान युद्ध परिस्थितियों के कारण शिपिंग परिवहन प्रभावित हुआ है और निर्यात के लिए माचिस भेजी नहीं जा रही है। स्थानीय स्तर पर भी हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे।उद्योग प्रतिवर्ष लगभग 800 करोड़ रुपये का घरेलू व्यापार और 600 करोड़ का अंतरराष्ट्रीय व्यापार करते हैं। कुल मिलाकर 1400 करोड़ रुपये का व्यवसाय होता है। यह उद्योग लगभग पांच लाख श्रमिकों को रोजगार प्रदान करता है। तमिलनाडु प्रांत के तूतीकोरिन, विरुधुनगर, तेनकाशी, धर्मपुरी, कृष्णागिरि, वेल्लोर और गुडियाथम जैसे जिलों में माचिस उद्योग पिछले 100 वर्षों से एक प्रमुख आजीविका का स्रोत रहा है।कई कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद आज भी एक माचिस की डिब्बी एक रुपये में ही बेच रहे हैं। 20 वर्ष पहले भी यही कीमत थी। जबकि अन्य सभी वस्तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। प्रतिस्पर्धा, विभिन्न दबावों तथा चीनी सिगरेट लाइटरों और उनके स्पेयर पार्ट्स की अधिकता के कारण हम आज भी उसी दर पर बेचने को मजबूर हैं। अब भारत में ही चीनी मशीनों से लाइटर बनाए जा रहे हैं। जिससे माचिस की बिक्री में भारी गिरावट आई है।