इंद्रा एक्सप्रेस नेटवर्क
बदलापुर, जौनपुर। सती ने राम कथा नहीं सुना जिस कारण पिता के यहाँ जलकर मर जाना पड़ा जबकि मैया सीता अशोक वाटिका में जलकर मरना चाहती थीं लेकिन हनुमान जी के मुख से राम कथा सुनने से सारा दुख दूर हो गया। उक्त बातें श्रीराम जानकी मंदिर पुरानी बाजार घनश्यामपुर में आयोजित तीन दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव में वाराणसी से पधारे मानस कोविद डा. मदन मोहन मिश्र ने प्रथम दिन कहा।साथ ही उन्होंने आगे कहा कि प्रतिकूलता में अनुकूलता का अनुभव करना ही भक्ति है। भगवान् शंकर बिष, अमृत, चूहा, सर्प, बाघ, बैल जैसे विरोधी तत्वों में सन्तुलन बनाये रखते हैं। यदि सती जी कुंभज ऋषि के यहाँ कथा सुनी होतीं तो श्रीराम पर संदेह न करतीं और न ही सीता का रूप बनाकर परीक्षा लेतीं। सती राम की परीक्षा लेती हैं तो सूपनखा समीक्षा करती है जबकि शबरी मैया प्रतीक्षा करके नौ भक्ति पा जाती हैं। इस मौके पर आये लोगों का स्वागत प्रधान राम जियावन ने किया। कार्यक्रम का संचालन डा. धर्मेन्द्र शुक्ल ने किया। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।